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विज्ञान कविता

Vivek Singh

Mere Alfaz
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                            आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की,
        
                                                    
                            
न्यूटन के गति और ग्राहम बेल के फोन की। 

एडिसन ने बल्ब को खोजा वही प्रकाशराज है, 
वेवेज ने कंप्यूटर खोजा,तकनीकी सम्राट है। 

देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की। 

देखों अपने बॉयल,चार्ल्स के ताप-दाब संबंधो को,
इसने सारा जीवन काटा खोजो और प्रयोगों पे। 

ये है अपना प्रोटान नाज इसे रेडफोर्ड पे,
इलेक्ट्रान को थॉमसन और न्यूट्रॉन को चैडविक पे। 

देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की। 

देखों मिट्टी का उपजाऊ वोहलर का यूरिया था,
उगल रही है कण कण से बंजर भूमि का सोना था। 

टेलिस्कोप नाम था मुट्ठी में यह सारा ब्रम्हांड था,
बोली हर-हर गैलीलियो की बच्चा-बच्चा बोला था।

देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की। 

अलेक्जेंडर फ्लेमिंग आए पेंसिलीन से घाव भराये,
आनुवांशिकी का दान कर लो मेण्डल का सम्मान। 

एक्स किरण है मैक्स प्लांक के मेहनत का इनाम,
सरल जीव से सॄष्टि आयी हो गया डार्विन नाम।

देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की। 

देखि रेडियो मारकोनी का,मन उमंग से भरा सभी का,
हरगोविंद खुराना तोफा लाये अपने कृत्रिम जीन का। 

विज्ञान प्रगति का है सपना ज्ञान हो विज्ञान का,
सब पढ़े सब बढ़े नाम हो भारत देश का। 

यहां वैज्ञानिकों ने लगा दी बाजी अपने जान की,
आओ बच्चों तुम्हें दिखाए,झांकी विज्ञान की। 

-विवेक कुमार सिंह


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