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सफ़र सफ़र

Vishnu Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं जब भी जिंदगी के सफ़र को देखता हूँ,
        
                                                    
                            
खुद को देखता हूँ, फिर असर को देखता हूँ।

किसी की मुझमें बसर करती है हँसी,और
उस पर अपने होंठों के सब्र को देखता हूँ।

आ चुका है बहुत अंदर तक वह मेरे घर में,
इस पर भी मैं खुद को सफ़र में देखता हूँ।

वह अच्छा है, और अच्छों-अच्छों से भी बहुत अच्छा है,
न जाने क्यों इस अच्छाई से मैं खुद को बेख़बर देखता हूँ।
- विष्णु नेह
2 महीने पहले
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