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मेरी सुंदरी

Vishnu pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अति प्रिय जीवन का स्नेहिल फूल अभी अधूरा है,
        
                                                    
                            
आकांक्षी भावों का संगम अभी अधूरा है,
तुम्हारे आलिंगन में तुम्हारी पेशानी मैं चूमूं
“सुंदरी”, तुम्हारे नाम की मुंदरी पहनना अभी अधूरा है।

नवल शिशु की मुस्कान सह्रदय तुम्हारी है ,
इस रेशमी डोर का एक छोर मेरा एक छोर तुम्हारा है,
हो फूलों से सुशोभित जहां तितलियों का मेला है,
आ जाओ घर के आंगन में अब मां का कंगन तुम्हारा है।

तुम प्रेयसी मेरी, यूं ही निज भाव से स्वीकार करूं,
हो प्रेम की तरंगिणी ,जिसमें तन- मन से स्नान करूं ,
तुम्हारी मुखरता भी चाहिए और शालीनता भी चाहिए,
प्रेम की धरा पर प्रेम से प्रेम का घर खड़ा करूं ।

तुम नित ‘ओस की बूंद’ सी मुझपर झरती हो,
जैसे मुरझाए फूलों पर टिककर प्राण भरती हों,
तुम ‘ बारिश ‘ बन मौसम में मुझपर ऐसे बरसती हो,
जैसे ऊंचे शिखरों पर अपना आंचल फैलाती हो।

तुम सहस्त्र गुलिस्तां की इकलौती रानी हो,
इतनी खुशबुओं को समेटकर तुम क्या करती हो ?
जब मैं प्यासे क़दमों से कभी तुम्हारे चमन में आ जाऊं,
दिखाकर रंग फूलों का तुम मेरा मन मोहती हो।

तुम्हारा नाम मेरे अंतर्मन में ऐसे रहता है,
जैसे मेरी नसों में लहू दौड़ता है ,
तुम्हारे स्नेहिल स्पर्श का कैसे अधिकारी बनूं,
मेरे और तुम्हारे मौन में अब शोर बहुत रहता है।

 
2 महीने पहले
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