विज्ञापन

आत्म विश्वास और संकल्प

Vishal Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न हो साथ कोई, मैं अकेला सहस्रबाहु बन जाऊंगा।
        
                                                    
                            
आज अकेला हूँ मैं, कल शून्य से हजार बनाऊंगा।
नहीं चाटूंगा मैं किसी के तलवे, न कहीं शीश झुकाऊंगा।
आज वक्त नहीं मेरे साथ, पर मैं अब वक्त को भी गुलाम बनाऊंगा।
चाहे लगा दूं जी-जान मैं अपनी, पर इस लायक बनकर दिखलाऊंगा।
कोई भी आए सामने मेरे, तूफानों, पहाड़ों, दरिया से लड़ जाऊंगा।
-विशाल कुमार वर्मा
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12618 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile