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बचपन की यादें

Vipul Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इकठ्ठा करने में लगा था मैं उन बचपन की यादों को...
        
                                                    
                            
उन खिलखिलाते लम्हों को उन किस्सों और वादों को...
इतने सपने जो सब अपने कुछ अपने उन यारों को...

इकट्ठा करने में लगा था मैं उन बचपन की यादों को ।

वो शोरगुल हल्लागुल्ला मेलजोल जो होता उन तीज त्योहारों को...
चलते थे जो छप छप करते उस सावन की बरसातों को...

इकट्ठा करने में लगा था मैं उन बचपन की यादों को ।

कुछ हंसाती कुछ रुलाती उन हसीन बचपन की सौगातों को...

इकठ्ठा करने में लगा था मैं उन बचपन की यादों को....!!!

- विपुल मिश्रा


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6 वर्ष पहले
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