किसकी थी ये साज़िश
किसने ये गुनाह कराया
दहकते थे शोले
जिन आंखों से
अश्कों का वहाँ
सृजन कराया
किसकी थी ये साज़िश
किसने ये गुनाह कराया
रहा था इतिहास जहां
हाथों में खड्ग ,
खप्पर , त्रिशूल का
उन हाथों में चूड़ियों का
श्रंगार कराया
किसकी थी ये साज़िश
किसने ये गुनाह कराया
पहुंचाया था यमसदन
पहन मुंड की माला
शक्ति का किसने
अबला है बनाया
आत्मदाह का
नया पाठ पढ़ाया
किसकी थी ये साज़िश
किसने ये गुनाह कराया
- विनोद यादव 'शहीद'
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