लीला तुम्हें करनी थी
उद्धार रावण का तुम्हें करना था
दुःखियों का दुःख तुम्हें हरना था
फिर क्यों मुझसे वन प्रतिज्ञा दिलवाई
क्यों एक माँ से माँ की ममता हरवाई
गीता तुम्हें सुनानी थी
उद्धार रथी महारथियों का तुम्हें करना था
भार पृथ्वी का कम तुम्हें करना था
फिर क्यों मुझसे भीम प्रतिज्ञा करवाई
थी वीरों के सभा में तुम्ही ने मेरी लाज बचाई
पालन सतीधर्म सिर्फ मुझे क्यों करना था
हूँ समान फिर भी क्यों अबला रहना था
हाथों का खड्ग खप्पर क्यों भूलना था
कभी मैं गौतमी कभी मैं शकुंतला कहलाई
क्या देव क्या नर पर कर्मों की सजा ही मैंने पाई
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