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सावन की फुहार

Vineeta Karmsheel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ठंडी ठंडी फुहारें
        
                                                    
                            
खिड़की से देखी कल मैंने,
चमक रही थी बिजली
बन कर बदल के गहने।

झूमती बेलों संग पत्तियाँ,
बूँदें करती गुदगुदी,
इठलाती तने वट की,
जैसे मिली हो सारी खुशी।

घास की चमक, मिट्टी की खुशबू,
हरियाली ऐसी जैसे
सावन ने पहने अपने,
सबसे कीमती गहने।

धरा पर जल की धार सी,
कभी बूंदों की बौछार सी,
प्रेम सुधा ईश्वर की,
बरसे सावन धरती पर उपहार सी।
-विनीता कर्मशील
21 घंटे पहले
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