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सावन की फुहार

                
                                                         
                            ठंडी ठंडी फुहारें
                                                                 
                            
खिड़की से देखी कल मैंने,
चमक रही थी बिजली
बन कर बदल के गहने।

झूमती बेलों संग पत्तियाँ,
बूँदें करती गुदगुदी,
इठलाती तने वट की,
जैसे मिली हो सारी खुशी।

घास की चमक, मिट्टी की खुशबू,
हरियाली ऐसी जैसे
सावन ने पहने अपने,
सबसे कीमती गहने।

धरा पर जल की धार सी,
कभी बूंदों की बौछार सी,
प्रेम सुधा ईश्वर की,
बरसे सावन धरती पर उपहार सी।
-विनीता कर्मशील
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9 घंटे पहले

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