बलिदान कर अमर कर गए,
नम आँखें, नमन उनको,
कोटि कोटि प्रणाम उनको।
कोटि कोटि प्रणाम उनको।
जग से नाता तोड़ दिया था,
अपनो को आधा छोड़ दिया था,
खुद को आजादी के लिए,
हँसते हँसते तोल दिया था।
उन वीर सपूतों को प्रणाम,
जिन्होंने स्वतंत्रता का मूल दिया था।
देखा ना हमने आजादी का दौर,
कहानियों में हम सुनते हैं,
भले ना थें, हम उनके साथ,
हर पल उनको, नमन हम करते हैं।
एकता, शांति, अनुशासन मिल कर,
बनाएंगे सुंदर हिंदुस्तान..!!
स्वतंत्रता यू हीं व्यर्थ न जाये,
सेनानियों का यही है स्वाभिमान...!!
शब्द नहीं, कर्म बोलेंगे,
तभी बनेगा देश महान..!!
तिरंगा ऊँचा पर्वत सा,
झुके न कभी, बना रहे सम्मान..!!
-विनीता कर्मशील