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सरे-बाज़ार छोड़ गया

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द-ए-मोहब्बत का किस्सा किससे कहा जाए,
        
                                                    
                            
जो छोड़ के चला गया हमें सरे-बाज़ार,
उसे अपना कैसे कहा जाए।

जिसके नाम से धड़कता था कभी दिल हमारा,
उसी ने लूट लिया मोहब्बत का आशियाना सारा,
अब टूटे हुए दिल को किससे जोड़ा जाए,
जो छोड़ के चला गया हमें सरे-बाज़ार,
उसे अपना कैसे कहा जाए।

हमने तो उसकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढी थी,
उसकी हर ख़ता भी मोहब्बत समझकर छोड़ दी थी,
वो ही पूछे अब वफ़ा का हिसाब तो क्या कहा जाए,
जो छोड़ के चला गया हमें सरे-बाज़ार,
उसे अपना कैसे कहा जाए।

जिसे उम्रभर अपना समझने की ख़ता कर बैठे,
वो गैरों की महफ़िल में हमें तन्हा कर बैठे,
अब उस शख़्स को दिल का हिस्सा कैसे कहा जाए,
जो छोड़ के चला गया हमें सरे-बाज़ार,
उसे अपना कैसे कहा जाए।
- विकास त्रिपाठी 'विक्की'
2 महीने पहले
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