रावण लाखों छिपे हैं हमारे बीच,
अब राम को ही कुछ करना होगा।
लेकर नए अस्त्र-शस्त्र फिर से,
प्रभु को नया अवतार लेना होगा।
छल, कपट और पाप का जो फैला अंधियारा है,
उसे मिटाने को फिर धर्म का उजियारा लाना होगा।
मर्यादा की नींव हिल रही इस कलयुग के तूफ़ान से,
सत्य की शक्ति का फिर से विश्वास जगाना होगा।
हर मन में सोए राम को अब तो जागना होगा,
अधर्म के इस रावण का संहार फिर से करना होगा।
सभी आदरणीय अध्यापकों एवं इष्ट-मित्रों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
— विकास त्रिपाठी 'विक्की'