चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाते हैं,
तुम मेरा पता पूछना, और मैं तुम्हारा दिल बता दूँगा।
तुम पूछना कि कहाँ रहते हो आजकल,
मैं कहूँगा—जहाँ तुम्हारी यादें साँस लेती हैं।
तुम मेरा नाम अनजान बनकर लेना,
मैं तुम्हें अपनी हर दुआ का मतलब बता दूँगा।
तुम नज़रों से मुझे पहली बार देखना,
मैं उसी पल फिर से मोहब्बत कर बैठूँगा।
तुम कहना कि क्या हम पहले मिले हैं कहीं,
मैं मुस्कुराकर कहूँगा—शायद किसी अधूरी दुआ में।
तुम मेरा हाथ अजनबी समझकर थाम लेना,
मैं उसे मुक़द्दर की सबसे हसीन लकीर मान लूँगा।
तुम अपना दिल छुपाने की कोशिश करना,
मैं उसकी हर धड़कन पहचान लूँगा।
फिर जब बिछड़ने की घड़ी आए,
इस बार ख़ुदा से जुदाई नहीं, तुम्हें माँगूँगा।
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाते हैं,
तुम मेरा पता पूछना, और मैं कहूँगा—
"मेरा पता नहीं... मेरा घर तो तुम्हारा दिल है।"
- विकास त्रिपाठी 'विक्की'