नफ़रत को चाहत में बदल दिया,
तुम्हारी मोहब्बत ने कमाल कर दिया।
सूनी पड़ी थी दिल की हर एक राह,
तुमने उसे ख़्वाबों से गुलज़ार कर दिया।
जो अश्क़ बरसते थे हर शाम मेरी,
होंठों पर हँसी का उजाला कर दिया।
बुझते हुए अरमानों की लौ को,
अपने प्यार से फिर मशाल कर दिया।
अब हर दुआ में बस तेरा ही ज़िक्र है,
रूह को इश्क़ का गुलाल कर दिया।
जो ख़ुद से भी बिछड़ चुका था कभी,
तुमने उसे ख़ुद से बहाल कर दिया।
तेरी एक मुस्कान की ख़ातिर सनम,
हर दर्द को मैंने हलाल कर दिया।
अब ज़िंदगी शिकायत नहीं करती,
तेरे इश्क़ ने हर सवाल कर दिया।
नफ़रत को चाहत में बदल दिया,
तुम्हारी मोहब्बत ने कमाल कर दिया।
-विकास त्रिपाठी "विक्की"