विज्ञापन

कुछ कह न सका

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज कुछ कहना था उनसे,
        
                                                    
                            
पर कुछ कह न सका।

उनका चेहरा चिराग़-सा रौशन था,
मैं अपनी नज़रें ही उठा न सका।

लबों तक आए हज़ारों अल्फ़ाज़,
मगर दिल उन्हें आवाज़ दे न सका।

वो मुस्कुराते रहे मेरी ख़ामोशी पर,
मैं अपना हाल-ए-दिल सुना न सका।

शायद मोहब्बत का यही दस्तूर है,
हर एहसास लफ़्ज़ों में ढल नहीं पाता।

कुछ इश्क़ आँखों से ही बयाँ हो जाते हैं,
और कुछ उम्रभर दिल में ही रह जाते हैं।
-विकास त्रिपाठी 'विक्की'
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile