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खुली आँखों का ख़्वाब

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ इस तरह से तुम्हें अपनी आँखों में बसाया है,
        
                                                    
                            
जैसे खुली आँखों से सपना देखता हो कोई।
तेरी तस्वीर को दिल में कुछ यूँ सजाया है,
जैसे बिखरे हुए ख़्वाबों को समेटता हो कोई।
तेरी यादों से महकती हैं मेरी तन्हा रातें,
जैसे चाँदनी में ख़ुद को ढूँढ़ता हो कोई।
तू सामने नहीं, फिर भी हर तरफ़ तू ही तू है,
जैसे धड़कनों में किसी को महसूस करता हो कोई। 
— विकास त्रिपाठी ‘विक्की’ 
एक महीने पहले
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