विज्ञापन

काश समझ जाते तुम

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जज़्बातों को अगर मेरे समझ जाते तुम,
        
                                                    
                            
किसी और के होकर ना रह जाते तुम।

मेरी आँखों में जो सपने थे, पढ़ जाते तुम,
मेरे हिस्से की भी खुशियाँ गढ़ जाते तुम।

मेरी ख़ामोश मोहब्बत को अगर सुन लेते,
बीच राहों में यूँ तन्हा न कर जाते तुम।

दिल की हर धड़कन तुम्हारा ही नाम कहती थी,
एक नज़र प्यार से मुझ पर भी धर जाते तुम।

मैंने हर दर्द हँसकर तुम्हारी ख़ातिर सहा,
एक पल मेरे लिए भी ठहर जाते तुम।

मेरी चाहत में न दौलत थी, न कोई लालच,
सिर्फ़ एहसास के रिश्ते ही समझ जाते तुम।

आज जो अश्क मेरी आँख से बहते हैं यहाँ,
इनको मुस्कान में शायद बदल जाते तुम।

अब तो यादों का धुआँ दिल में ही उठता है,
एक बार लौट के सीने से लग जाते तुम।

आज अफ़सोस यही दिल को रुलाता है बहुत,
जज़्बातों को अगर मेरे समझ जाते तुम।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile