लफ़्ज़ों का क़द कभी आवाज़ से नापा नहीं जाता,
ख़ामोश कलम का फ़ैसला बदला नहीं जाता।
जो लोग हमें मिटाने का ख़्वाब रखते हैं,
उन्हीं के ज़िक्र से अपना नाम लिखा नहीं जाता।
वक़्त गवाह है, किरदार ही पहचान बनाता है,
चेहरे बदल जाने से इतिहास बदला नहीं जाता।
हमने तो बस सच को सलीके से लिखा है 'विक्की',
सच लिखने वालों का मुक़द्दर खरीदा नहीं जाता।
- विकास त्रिपाठी "विक्की"