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शीर्षक : इश्क़ की आख़िरी गवाही

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज़माया कईयों ने मुझे, पर मैं बिखरा नहीं,
        
                                                    
                            
मोहब्बत आज भी तेरी ज़िंदा है मुझमें कहीं।
बदल गए लोग, बदल गए मौसम, बदल गई राहें,
मगर तेरे नाम पर धड़कता ये दिल बदला नहीं।
जिसे लोग हार समझ बैठे, वही मेरी वफ़ा थी,
मैंने इश्क़ छोड़ा नहीं, बस उसका शोर किया नहीं।
तू किसी और की दुनिया में मुस्कुराती रही,
मैंने तेरी ख़ुशी के आगे कोई सवाल किया नहीं।
ये इश्क़ था जनाब, कोई सौदा नहीं,
जो हर नए चेहरे पर दोबारा हो जाए।
मैं आज भी वहीं हूँ, जहाँ तू मुझे छोड़ गई थी,
बस फ़र्क़ इतना है कि अब किसी से शिकायत नहीं।
आज़माया कईयों ने मुझे, पर मैं बिखरा नहीं,
मोहब्बत आज भी तेरी ज़िंदा है मुझमें कहीं।
— विकास त्रिपाठी "विक्की"
3 महीने पहले
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