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उड़ान

vijyendra kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह बाधा नहीं आधी दुनियाँ है
        
                                                    
                            
बिना उनके मानव जाति अधूरा है
इस चल अमृत भुवन में
उड़ने दो उन्हें ,उनके सपनों की उड़ानों में
खिलने दो उन्हें ,उनकी फूलों की बहारों में
इस चल अमृत भुवन में
वह घर की लक्ष्मी हैं, दुर्गा हैं, सरस्वती है
वह श्रद्धा है, विश्वास है, सम्मान है
इस चल अमृत भुवन में
एक घर की मान बढ़ाती ,दूसरे में संसार सजाती
पलकों पर सबको बैठाती
इस चल अमृत भुवन में
निःशब्द नहीं वह ,विचारों की अलौकिक जननी है
संस्कारित, और घर की एक दुलारी रमणि है
इस चल अमृत भुवन में
पुनः स्मरणार्थ, वह इस धरा की संजीवनी है
मेरे आंगन में भी बिटिया 'आशिता' और ' पल्लवी' है
इस चल अमृत भुवन में
-विजयेंद्र कुमार
2 वर्ष पहले
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