सृष्टि के संहार को रोकने,
पिया हालाहल विष,
कंठ नीला,
तन ज्वलंत,मन बेचैन,
जीवन में मंथन,
रावण ने इष्ट की पीड़ा को भांपा,
ज्ञानी था,
पीड़ा हरने नदियों का पवित्र जल,
कलश में भर,
शिव पर जल और दूध की धार डाली,
दही का लेप
जलन हुई नगण्य,
बेलपत्र और धतूरे से मिली राहत,
श्रावण में दूध पीना वर्जित हो जाती अपच,
शिव प्रसन्न हुए रावण से,
अनगिनत आशीर्वाद दिए,
सृष्टि के संहार कों रोकने,
पिया हालाहल विष,
विष के प्रभाव को कम करने वासुकी नाग कंठ से लिपट गया,
श्रावण में शिव धरा पर भ्रमण को आए,
इंद्र देव ने वर्षा की,
चहूं ओर हरियाली,
अन्न धन से धरा भरी,
छाई प्रसन्नता खग मृग इंसान के,
मुखमंडल पर,
कांवड़िया बम बम भोले का
जयकारा
शिव लिंग पर एक लोटा जल से
करें प्रसन्न,
भक्तों की मनोकामना कर रहे पूर्ण,
दृश्य मनोरम नदियों से छलकता पानी,
फलों के भार से झुक रहे वृक्ष,
भांति भांति के रंग बिरंगे पुष्प,हरियाली
धरा का कर रहे श्रृंगार,
सहस्त्रधारा कर शिव का नाम ले,
निर्मल कर रहे तन मन,
भक्ति देख शिव ने सबकी मनोकामना की पूर्ण,
शिव हैं भोले भंडारी,
भस्मासुर ने किया तप ,
शिव हुए प्रसन्न,
मांगा वरदान,
जिसपर हाथ रखूं,
हो जाए भस्म,
भस्मासुर शिव को स्पर्श कर,
भस्म करना चाहे,
विष्णु ने मनमोहनी का रूप धर,
भस्मासुर संग किया नृत्य,
खो गया नृत्य में,
नृत्य करते करते सिर पर रख दिया हाथ,
भस्मा सुर भस्म हो गया,
रावण शिव का प्रिय भक्त,
मुक्ति भी दी विष्णु के अवतारी से,
शिव हैं कल्याणकारी,
शिव की भक्ति में शक्ति,
ॐ नमः शिवाय।