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मां अपने बच्चे को मरते देख रही

vijaya Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक मां अपने बच्चे को मरते देख रही थी,
        
                                                    
                            
बिल्ली के परिवार ने डेरा डाला,
दूध पीते खेलते,
अचानक गायब हो गए,
घर में सन्नाटा छा गया,
बच्चे शिकार की तलाश में घूमते,
छोटे थे नासमझ थे,
सड़क के खतरों से अनजान,
बिल्ली के साथ सड़क पार कर रहे थे,
अंधेरे में कुतिया ने हमला बोला,
एक बच्चे को मुंह में दबा कर,
पिल्लों और कुतिया ने स्वाद से खाया,
बिल्ली कुछ कह न सकी,
मां मजबूर,
बड़े रसूखदारों की करते इज्जत,
इज्ज़त की आड़ में,
कब कठपुतली बन जाते,
करते मनमानी,
अपने बच्चों के लिए भी आवाज न उठा पाते,
मौन ,घुटन,बददुआ,
यही जीवन,
समय सबको जबाव देगा,
एक अरसा बीत जाता,
साहस बटोर सामना किया,
ज्ञात हुआ अमरबेल है,
औरों की मेहनत और पैसों पर फूलते,
एक मां अपने बच्चे को मरते देख रही थी,
कुंवर की धाय,
सिंहासन के लालच में कुंवर की हत्या,
रसूखदारों का भय ,
या कर्तव्यनिष्ठा,
पन्नाधाय अपने बच्चे को मरते देख रही थी,
कुछ न कर सकी।
मां भगवान होती है या,
भय में सिमटी दुखों की चादर ओढ़े,
प्रार्थना तो करती है पर सामना नहीं
2 महीने पहले
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