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धाय मां पर एक कविता

vijaya Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किस्सा मरू भूमि की मां का,
        
                                                    
                            
गाय सी
स्तनपान करा राजकुंवर को
कोख जाए बालक को,
खिलाए राबड़ी ओर र्छाछ ,
मालिश करे,ढिटौना लगाए,
आंख से ओझल ना हो,
राजमहल में खेले संग राजकुमार संग,
कद काठी एक जैसी,
किस्सा मरुभूमि की मां का,
षड्यंत्र राजमहल में,
लालच राजगद्दी का,
संकट के बदल गहराए राजकुंवर पर,
आहट सुन हत्या की,
अपने पुत्र को वस्त्र पहना राजकुंवर के
सुला दिया हत्या शैय्या पर,
आया बलबीर निद्रा में ही बालक पर टूट पड़ा,
कर दी निर्मम हत्या,
खून से लथपत निज पुत्र की मृत्यु पर,
बहा ना सकी अश्रु,
न्यौछावर कर दिया अपना पुत्र,
राजगद्दी पर
समेटा शव निभाया धर्म धाय मां का,
घर घर बांची जाने लगी पन्ना धाय की कहानी,
3 वर्ष पहले
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