आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धाय मां पर एक कविता

                
                                                         
                            किस्सा मरू भूमि की मां का,
                                                                 
                            
गाय सी
स्तनपान करा राजकुंवर को
कोख जाए बालक को,
खिलाए राबड़ी ओर र्छाछ ,
मालिश करे,ढिटौना लगाए,
आंख से ओझल ना हो,
राजमहल में खेले संग राजकुमार संग,
कद काठी एक जैसी,
किस्सा मरुभूमि की मां का,
षड्यंत्र राजमहल में,
लालच राजगद्दी का,
संकट के बदल गहराए राजकुंवर पर,
आहट सुन हत्या की,
अपने पुत्र को वस्त्र पहना राजकुंवर के
सुला दिया हत्या शैय्या पर,
आया बलबीर निद्रा में ही बालक पर टूट पड़ा,
कर दी निर्मम हत्या,
खून से लथपत निज पुत्र की मृत्यु पर,
बहा ना सकी अश्रु,
न्यौछावर कर दिया अपना पुत्र,
राजगद्दी पर
समेटा शव निभाया धर्म धाय मां का,
घर घर बांची जाने लगी पन्ना धाय की कहानी,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर