विज्ञापन

तुम्हारी हंसी

Vijay Erry

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            :और तुम्हारी हँसी है जैसे सूरज की किरण,
        
                                                    
                            
नदियों पे नाचती, सपनों का चयन,
मधुर धुन सी, उजली उजास,
छाया मिटाती, लाती विश्वास।जैसे पवन की फुसफुसाहट खेतों में बहती,
तेरी खुशी से आकाश रंगों में ढलती,
हर मुस्कान एक ज्वाला, हर स्वर एक गीत,
तेरे नाम से जीवन हो जाता नवीन।हवा के परों पर जैसे कोई गान,
तेरी दया का लय, अनुपम विधान,
खामोशी टूटे, दिल गाने लगे,
तेरी हँसी से ऋतु बसंत जगमगाए।क्षणों में लहराए, समय में चमके,
स्वर्णिम तराना, आकाश में दमके,
तारे झुकें, चाँद झूमे साथ,
तेरी हँसी से रात बने प्रभात।अंधेरे में आशा का दीप जलाए,
सूखी ज़मीं पर फूल खिला जाए,
थके को आराम, टूटे को चैन,
तेरी हँसी है प्रार्थना, मिटाए हर बैर।घाटियों में गूँजे, सागरों को छू ले,
प्राचीन वृक्षों की सरसराहट में ढल ले,
आत्मा का भजन, दिव्य गान,
तेरी हँसी है प्रेम का विधान।भोर को उजाले, वर्षा को नरमाए,
स्पर्श से उपचार, पीड़ा को घटाए,
तेरी हँसी की गर्माहट से जग नया हो,
यह रहस्य है जिसे हर दिल खोजे।तो हँस, और आकाश अपनी आँखें खोले,
सूरज जागे, धरती भी डोले,
तेरी हँसी है उपहार, एक अमर राग,
फुसफुसाहट, समीर, जहाँ सबका भाग।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all