'सागर' की गहराई को लोग नापने बैठे हैं
वेगवती लहरों को लोग दबाने बैठे हैं.
पुराने जख्म ही अभी भर नहीं पाए,
नये-नये घावों को लोग उगाने बैठे हैं...
- विद्या सागर 'बलियाठी'