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मैं नई इबारत लिखती हूँ, इतिहास नया मैं रचती हूँ।

veena Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आप सभी को वीना उदय का सादर नमस्कार
        
                                                    
                            
आप सब को नवरात्र की शुभकामनाएं और माता रानी को मैं अपनी कविता
दुर्गा और भवानी अर्पण कर रही हूँ।

मैं दुर्गा और भवानी हूँ,
करुणा की अमिट कहानी हूँ।
मत देवी मान मुझे पूजो,
मत केवल काया समझो।

उड़ने का अधिकार मुझे दे दो,
संग शिक्षा संस्कार मुझे दे दो।
सम्मान भरा संसार मिले,
जीवन को नया विस्तार मिले।

ना देह का कोई बाज़ार मिले,
ना गिद्धों का संसार मिले।
निर्भय होकर मैं जी पाऊँ,
अपनी मंज़िल मैं खुद पाऊँ।

मैं शक्ति हूँ, मैं भक्ति हूँ,
मैं प्रेम की अमिट निशानी हूँ।
मैं सृजन, समर्पण, स्वाभिमान,
मैं युग-परिवर्तन की कहानी हूँ।

मैं कोमल हूँ, कमज़ोर नहीं,
मैं मौन सही, मजबूर नहीं।
मैं नई इबारत लिखती हूँ, इतिहास नया मैं रचती हूँ।

मैं दुर्गा और भवानी हूँ,
करुणा की अमिट कहानी हूँ।
मुझमें ममता, मुझमें ज्वाला,
मैं शक्ति, साहस और उजाला।

मत बंधन में मुझको जकड़ो,
मत सीमित मेरी उड़ान करो।
मेरा अधिकार मुझे दे दो
थोड़ा सम्मान मुझे दे दो।

मैं दुर्गा और भवानी हूँ,
करुणा की अमिट कहानी हूँ!
एक घंटा पहले
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