एक कवि का ईश्वर उससे
धूप, नैवेद्य या मौन प्रार्थनाएं नहीं मांगता,
वह उसकी मुखर अभिव्यक्ति मांगता है
वह एक आदेश बनकर हृदय में गूंजता है कि
संसार का दुःख ही तुम्हारा दुःख है,
इसलिए उठो ! और गवाह बनो
इस बहते हुए समय के,
हर टूटते हुए आदमी के
क्योंकि जब-जब तुम मौन रहते हो,
ब्रह्मांड का एक सच अनसुना रह जाता है
इसलिए लिखो--
कि तुम्हारी स्याही ही
मेरे होने का एकमात्र प्रमाण है ।
-- वेद प्रकाश तिवारी