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हृदय की आवाज

वैदेही वनवास

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँसुओं से बढ़कर यहां और विरज कैसी,
        
                                                    
                            
ये तो हृदय की आवाज है,
भर जाता है अविलंब हिया
क्योंकि ठेस इसे सुहाती नहीं,
छलनी भी छलनी छलनी हो जाती है,
इसमें ऐसा कोई खाशाक आता नहीं
पीड़ा में निकलने नहीं दे कोई इन्हें,
क्योंकि फिर जिंदगी रह जाती नहीं।
एक घंटा पहले
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Shivam Awasthi

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