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अकेला है पर कमजोर नहीं

Varun Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अकेला समझ कर वो मुझे अपना बना बैठे,
        
                                                    
                            
वो जो कहते थे हमसे कि मुहब्बत करते हैं हम,
वो किसी और को भी अपना बना बैठे ,
मैं दरिया सा बन गया हूँ,
मुझे अकेला ही रहने दो,
तुम फरेब की दुनिया के बाजीगर हो,
और मुझे बफा का ही रहने दो,
पहला इश्क जीना सिखा गया,
और दूसरा इश्क जिंदगी से लड़ना,
और सबसे बड़ी बात खुद को छोड़कर,
किसी से प्यार ना करना,
तीसरा इश्क मैंने खुद से किया है,
अब किसी और की जरूरत कहाँ हैं,
सब अकेला समझते हैं मुझको, पर मैं अकेला नहीं हूँ,
मेरे अंदर वो पूरा समंदर है, जिसकी गहराई जानोगे,
तो तुम भी डूब जाओगे ।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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