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कुछ अपनी कलम से

Vanshika Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब जो तू बन गया है यक़ीन मान, तू वो कभी था ही नहीं,
        
                                                    
                            
जिस शख़्स से मोहब्बत हुई थी मुझे, तू वो शख़्स अब रहा ही नहीं।

मैं भी कितनी भोली थी, जो तेरी हर बात को सच मान बैठी,
तेरी झूठी क़समों को मोहब्बत, और तेरी ख़ामोशी को मजबूरी मान बैठी।

तेरे बदलते लहज़े में भी तेरे पुराने प्यार को ढूँढ़ती रही,
तू दूर होता गया और मैं अपनी खता समझ ख़ुद से ही रूठती रही।

तूने तो वक़्त के साथ अपना असली चेहरा दिखा दिया,
कहना तो बहुत कुछ था तुझसे, मगर तेरी दूसरी मोहब्बत ने हर लफ़्ज़ को ख़ामोश बना दिया।

अब जो तू बन गया है यक़ीन मान, तू वो कभी था ही नहीं,
जिस शख़्स से मोहब्बत हुई थी मुझे, तू वो शख़्स अब रहा ही नहीं।।
3 घंटे पहले
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Rajan

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