विज्ञापन

वंदनीय यह देश है..

Vandana Agrawal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वंदनीय यह देश है,
        
                                                    
                            
प्रभुता इसकी अलौकिक।
जागृत हो सब चले,
बेड़ियां अज्ञानता की तोड़ें।

कृषक भूमि की कथा यही,
सदा परिश्रम पूज्य रही।
कर्म धर्म की सुखाली प्रणाली,
ऋतुओं की है छटा निराली।

शुचिता सिंधु की लहरें उठती,
प्रेम निधि निज निर्झर बहती।
वन कानन के सुन्दर पंछी,
पपीहे की कूक लगती अच्छी।

मुक्त पवन की श्रृंखला अनंत,
बजते पल्लव के भी लय सुभग।
पुलकित प्रातः दौड़े तरुओं पर,
आत्मबल सजे सैन्य बाजुओं पर।

छूते गर्वीले उच्च गगन,
दृढ़ साहस के बढ़ते कदम।
आनंदमय हिमालय हिम बरसाता,
भारत को शिरोमणि यह बनाता।
 ---वंदना अग्रवाल ' निराली '
 
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

444 कविताएं

View Profile