-'प्यासा'के भोजपुरी दोहे
अपना पर काबू करे, मनवा राखे हाथ।
विद्या,बुद्धि,बल विवेक, रहे ओहिके साथ।।
दिन पढाई में बीते, प्रात नीत उठ जाय।
'प्यासा' विद्यार्थी उहे,घर के नाव बढ़ाय।।
बैमानन के जिन्नगी,दू पल के अंजोर।
पहिले चमकी जोड़ से,बाद कहाई चोर।।
सीधा-सुन्दर आदमी,'प्यासा' जगत अभाव।
सीधवा भाई सीख ल,तू हूं जग के दाव।।
प्रेम पिपासा छोड़ दी, राखीं मन में आश।
अपना खेती से पुजी,सकल भूख आ प्यास।