~ गजल ~
जिनगी कहां किसानी में ।
डूबल सबकुछ पानी में।
गहूं-चना बोअत, बीतल,
खेता आ खलिहानी में।
फयदा घटी जबे जोड़ीं ,
पाईं खुद के हानी में।
दम कबो ना आवे सकल,
भइआ देह जवानी में ।
परिवार के पेट भरे न ,
करज रहे सिरहानी में।
घामा सहत चमड़ा जरल,
रहनी कथा कहानी में।
-'प्यासा'