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प्यासा कवि

विजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ~ गजल ~
        
                                                    
                            
जिनगी कहां किसानी में ।
डूबल सबकुछ पानी में।

गहूं-चना बोअत, बीतल,
खेता आ खलिहानी में।

फयदा घटी जबे जोड़ीं ,
पाईं खुद के हानी में।

दम कबो ना आवे सकल,
भइआ देह जवानी में ।

परिवार के पेट भरे न ,
करज रहे सिरहानी में।

घामा सहत चमड़ा जरल,
रहनी कथा कहानी में।
-'प्यासा'
एक घंटा पहले
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