ऐ वक़्त तुझ से क्या शिकायत करुं
क्यों रोऊ क्या तुझसे बाते करुं
मन बहुत उदास सा हुए जा रहा है
कहीं कुछ तो ऐसा है
जो हुए जा रहा है
जैसे कोई शांत सी नदी
बही जा रही है
ना कोई उमंग है ना कोई तरंग
फिर भी अपना कर्म किए जा रही है।