ज़िंदगी को इस तरह समझिए—
मानो ऊपर वाले ने हमें एक लंबे सफ़र पर भेजा हो।
कहा हो—
“जाइए, इस सफ़र का पूरा आनंद लीजिए।
जो भी करें, अपनी ज़िम्मेदारी के साथ करें।”
यह सफ़र छोटा नहीं है,
इसलिए एक घर तैयार कर लीजिए।
रोज़गार की व्यवस्था कर लीजिए,
क्योंकि यहाँ कुछ दिनों के लिए नहीं,
बल्कि कई वर्षों तक ठहरना है।
हम सभी एक ही स्थान पर हैं
जिसका नाम है- यह दुनिया।
यहीं रिश्ते बनते हैं,
यहीं परिवार बसते हैं,
शादियाँ होती हैं,
बच्चों की किलकारियाँ गूँजती हैं,
और जीवन का यह सफ़र निरंतर आगे बढ़ता रहता है।
लेकिन...
हर सफ़र की एक निश्चित मंज़िल होती है।
जब यह यात्रा पूरी हो जाएगी,
तो हमें वहीं लौटना होगा,
जहाँ से हम आए थे—
एक मासूम बच्चे की बनकर।