विज्ञापन

उल्फत में कभी जीत का दावा नहीं करते

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उल्फ़त में कभी जीत का दावा नहीं करते,
        
                                                    
                            
जिसे चाहें उसे दिल से जुदा नहीं करते।

वो सामने हो तो लफ़्ज़ों की ज़रूरत क्या है,
हम आँखों से भी अक्सर कोई शिकवा नहीं करते।

मोहब्बत की यही रीत हमें रास आई है,
जो अपना हो उसे दुनिया से रुसवा नहीं करते।

वो दूर है तो उसकी कमी महसूस होती है,
हम यादों को मगर दिल से ख़फ़ा नहीं करते।

कभी मिल जाए वो राहों में अचानक फिर से,
हम बीते हुए मौसम का गिला नहीं करते।

उल्फ़त अगर सच्ची हो तो दूरी भी कहाँ दूरी,
हम जिसको दिल में रखें, उससे फ़ासला नहीं करते।।
- राकेश कुमार तिवारी 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6854 कविताएं

View Profile

Junaid Ahmad

5 कविताएं

View Profile