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पूज्य जनक थे तरुण-पर्ण।

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोंपल थे हम, याद मुझे,
        
                                                    
                            
पूज्य जनक थे तरुण-पर्ण।

उम्र बढ़ी, मुरझाए वे,
हम हुए युवा,वे पीत वर्ण।

वृंत भग्न कर किया गमन,
भूले हम सब ,मस्त, मगन।

आह्लादित हिय,सुख का गुंजन
नवपल्लव का हुआ आगमन।

यही सनातन,और पुरातन,
यही सृष्टि का,चक्र चिरंतन।
-पुरुषोत्तम शर्मा 
एक महीने पहले
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