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नित नए नए स्वांग भरू

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या ही मैं श्रृंगार करू
        
                                                    
                            
नित नए नए स्वांग भरू

तुमने जितने वादे किये थे
तुमने जितनी कसमें ली थी
दुख से भरा हुआ दिल कहता
क्यू साजन तुम रूठ गए
सात जन्म के वादे के
एक वर्ष में टूट गए

तुम ही बताओ कैसी मेरी हालत
क्या ही में श्रृंगार करु
छोड़ गए जो तुम मुझको
किसी और से क्या आस करू

तुमने मुझे आजादी दी
लेकिन हद बताकर दी
हद बताकर दी जाए
वो आजादी नहीं जंजीर है
आजादी के नाम पर
तुमने कुचला मेरा जमीर है

तुम ही बताओ कैसी मेरी हालत
क्या ही में श्रृंगार करु
छोड़ गए जो तुम मुझको
किसी और से क्या आस करु



 
एक महीने पहले
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