क्या बचा रह गया दरमयां, इल्म नहीं, हां तसल्लियाँ बाकी है,
इस आशियाने को, खंडर होने में, महज़ कुछ सिदियाँ बाकी है, !
अरमानों के सब परिंदै, हमने खुद पिंजरे में कैद कर डाले,
खुले आसमानों में उड़ती, उम्मीद की एक चिड़िया बाकी है !!
ये खालीपन, दोनों तरफ, एक बराबर असर किया करता है,
उसे आईने से शिकायत रहती, मेरी गज़लों में काफ़िया बाकी है!!
ऐसा नहीं है कि जाते वक़्त, वो सबकुछ ही अपने साथ ले गया,
डायरी में सूखे गुलाब और तार-तार हो चुकीं, कुछ चिट्ठियाँ बाकी है!!
सारे महंगे खिलौने तो खैर, आसानी से बिक गए, उस मेले में,
दुकान के एक कोने में रखी, सुनहरी बालों वाली गुड़िया बाकी है!!
एक छोटा-मोटा घर, बच्चों की परवरिश, मसअले यहीं हल नहीं हो जाते,
" आनंद" इसके बाद भी सिर पर,
जिम्मेदारियों की, कई गठरीयाँ बाकी है!!