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चरणों में अरदास है, रखना मुझ पर कर।।

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                            शीश धरे शशि भाल पर, जट में गंग बहाय।
        
                                                    
                            
ललाट नयन अग्निमय, त्रिनेत्रधारी कहलाय।।

व्याघ्रचर्म धारण किए, धूनी रमाएँ नाथ।
‘ॐ नमः शिवाय’ जपे, भक्तों के दिन-रात।।

कंठ विराजे नाग हैं, भस्म रमाएँ अंग।
डमरू की ध्वनि गूँजती, हर ले मन के रंग।।

नीलकंठ विषपान कर, जग का किया कल्याण।
भोलेनाथ की भक्ति से, मिटते सब संताप।।

रौद्र रूप जब धारते, दुष्टों का संहार।
करुणामय बन भक्त पर, करते सदा उपकार।।

कोटि-कोटि प्रणाम हे, शम्भु शिव अभयंकर।
चरणों में अरदास है, रखना मुझ पर कर।।

अपराधों को क्षमा करो, हर लो मन का भार।
शिव-कृपा से सुख मिले, जीवन हो सुखसार।।
-अतिशा माथुर
 
एक महीने पहले
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