मैं दौड़ रहा उस दौड़ में,
जिस दौड़ में दुनिया दौड़ रही।
मैं घुस गया उस होड़ में,
जहाँ जाने की है होड़ लगी।
मैंने भी मन में ठानी है,
,मुझको भी मंजिल पानी है।
हर मोड़ पर लगती मंजिल है,
पर शुरू नई कहानी है।
पर मैंने हार न मानी है,
जब तक रगों में जवानी हैl
संघर्ष नहीं छोड़ूंगा मैं,
राह नहीं मोड़ूंगा मैं।
जब तक लक्ष्य न हासिल हो,
संकल्प नहीं तोड़ूंगा मैं।