देश को समर्पित ये वीर जवान हैं,
भारत माता की आन, बान और शान हैं।
न्यौछावर किया जिन्होंने तन-मन-प्राण है,
उनके कारण ही सुरक्षित हिंदुस्तान है।
सन् बासठ का वह रण अचानक छिड़ गया,
हिमशिखरों का शांत हृदय भी हिल गया।
दुर्गम पर्वत, बर्फ़ीली रातें, कठिन ठिकाना,
पर वीरों ने न छोड़ा अपना मोर्चा पुराना।
बहत्तर घंटे तक डटे रहे सीना तानकर,
हर संकट को ललकारा हँसते मुस्कान भर।
यह कोई कल्पित कथा नहीं, सच्चाई थी,
भारत माँ के सपूतों की अमर लड़ाई थी।
विरोधी थे संख्या में लाखों-हजारों में,
हमारे सैनिक चमके नभ के सितारों में।
शस्त्र भले ही कम थे, साहस अपार था,
हर सैनिक के भीतर भारत का विस्तार था।
अंतिम क्षण तक चौकी पर जसवंत खड़ा रहा,
मातृभूमि की रक्षा में अटल और अड़ा रहा।
प्राण गए पर ध्वज का मान झुकने न दिया,
अपने रक्त से इतिहास स्वर्णिम लिख दिया।
इनके लहू का देश सदा ऋणी रहेगा,
इनके शौर्य का सूर्य कभी न ढलेगा।
इनकी निष्ठा, प्रेम और बलिदान महान है,
हर भारतवासी को इन पर अभिमान है।
ऐसे वीरों का ऋण न चुका पाएँगे हम,
जीवन भर उनका यश गुनगुनाएँगे हम।
अमर है जसवंत, अमर तेरा बलिदान है,
तेरे चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम है।
-कुमकुम माथुर