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भाई-बहन के पावन बंधन की, सबसे सुंदर कहानी

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रेशम का यह धागा केवल, धागा नहीं निशानी है,
        
                                                    
                            
भाई-बहन के पावन रिश्ते की, सुंदर अमर कहानी है।

बहना थाली सजा के लाई, रोली, अक्षत, दीप जलाए,
भाई के माथे तिलक लगाकर, मंगल के गीत सुनाए।

कलाई पर जब राखी बाँधे, खिल उठता है मन सारा,
इस छोटे-से धागे में बँधा, प्रेम हमारा न्यारा।

न कोई धन-दौलत की चाहत, न कोई उपहार बड़ा,
बहन के स्नेह से बढ़कर जग में, नहीं कोई रिश्ता खरा।

भाई कहता—हर सुख-दुःख में, बहना साथ निभाऊँगा,
तेरी खुशियों की खातिर मैं, हर मुश्किल से लड़ जाऊँगा।

बहना भी मुस्काकर बोले—रिश्ता यूँ ही महकता रहे,
प्रेम-स्नेह की शीतल छाया, जीवन भर बरसता रहे।

बचपन की वे मीठी यादें, हँसी-ठिठोली प्यारी,
राखी के इस पावन पर्व पर, याद आए दुनिया सारी।

रेशम का यह धागा बाँधे, विश्वासों का सुंदर संसार,
जन्म-जन्म तक अटूट रहे यह, भाई-बहन का प्यार।

रिश्तों में मिठास बनी रहे, मन में रहे उजाला,
रक्षाबंधन का पर्व सजाए, जीवन का हर निवाला।

हे प्रभु! सदा सलामत रखना, भाई-बहन का साथ,
राखी के इस पावन पर्व पर, प्रेम रहे हर दिल के पास।

रेशम का धागा कहता है—रिश्ता दिल से निभाना,
रक्षा, प्रेम और विश्वास का, दीप सदा जलाना।

रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर, यही हमारी कामना,
हर बहना की मुस्कान खिले, हर भाई पाए सुख-संपदा।

रेशम का यह धागा बन जाए, प्रेम की अमर निशानी,
भाई-बहन के पावन बंधन की, सबसे सुंदर कहानी। 
-अतिशा माथुर
 
एक महीने पहले
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