वो रात थी चाँदनी,
माँ सुनाती थी कहानी,
छत पर जब भी हम सोते,
आकाश में टिमटिमाते तारों को देखते।
लेकिन पूनम के चाँद के आगे,
सब फीके-फीके लगते थे,
उसकी शीतल चाँदनी में,
हम सपनों के संसार में खोते थे।
माँ बताती थी कि पूनम का चाँद,
होता है विशेष,
शरद पूर्णिमा की रात को,
बरसता है अमृत का संदेश।
दूध-सी उजली चाँदनी में,
चाँदी-सा लगता था आकाश,
माँ की गोदी, माँ की बातें,
और तारों से सजा आकाश।
माँ कहती थी, देखो बेटा,
चाँद कितना सुंदर है,
जैसे ईश्वर की थाली में,
रखा हुआ कोई कुंदन है।
हम पूछा करते थे माँ से,
चाँद हमारे पास क्यों नहीं आता?
माँ हँसकर कहती थी हमसे,
वो दूर से ही प्यार जताता।
चाँद की चाँदनी में जब
हम खीर रखकर आते हैं,
चाँद अपनी शीतल किरणों से
उसमें अमृत बरसाता है ।
खीर को और मीठा बनाकर,
अपना नेह लुटाता है,
अपनी चाँदनी के संग-संग,
हम पर प्यार बरसाता है।
आज भी जब पूनम का चाँद,
अपनी चाँदनी बिखराता है,
बचपन की वो छत, माँ की कहानी,
सब कुछ याद दिलाता है।
चाँद आज भी उतना ही सुंदर है,
बस वो बचपन का एहसास नहीं,
माँ आज भी दिल में रहती है,
बस छत पर बैठकर सुनाने को
अब उसकी वो आवाज़ नहीं।
- नीता श्रीवास्तव ' लकी '