सबके उम्मीद पर खरा उतरना
करना सब का सम्मान।
आंसू मेरे भीतर देते संबल मुझको,
पलकों के रास्ते आना,नहीं आसान।
जख्म दिल पे था इतना गहरा ,
बाहर मर्यादा का पहरा,
कोशिश रही न छलके आंखों से,
अफसोस, निकल पड़ा अश्कों का कतरा।
फ़िक्र रखना सबकी,फर्ज मेरा,
मिला विरासत में मुझको।
अपनी चिंता की कहां परवाह।
रहता सजग,थोड़ी चूक कभी हो।
सुनना पड़ता,बंदा कितना लापरवाह।
कितना कुछ है सबके लिए करना।
उम्मीद पर सबके खरा उतरना।
दर्द हो गहरा,पर जुंवा से कुछ न कहना।
मुझे तो मुस्कुराते, यूंही चलते रहना।
--: *श्याम कुमार "सागर"*:--