मोहन कभी यमुना तट पर आओ तो सही।
कभी मेरे लिए भी बांसुरी बजाओ तो सही।
जो गीत राधा रानी के लिए गाया करते थे
उसकी एकाध पंक्तियां
कभी मेरे लिए भी गुनगुनाओ तो सही
- राजलक्ष्मी राज