सुंदरता सादगी की मूरत हो तुम।
रग रग में जो बसी वो सूरत हो तुम।
जहां में कोई दूजा नहीं इतनी खूबसूरत हो तुम।
किसी शायर की गजल, हे तू किताबों के काबिल हे।
रंगत हे तुझमें तारों की ,तुझी में चांद शामिल हे।
नजाकत हे तुझमें फूलों की ,कलियों सा तेरा दिल हे।
-मुकेश माथुर