मेरी आँधी अभी बाकी है
चुप हूँ,
शांत हूँ,
खुद में हूँ मैं,
कुछ एकांत हूँ।
रुका हूँ,
पर मेरी चाल अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
राख हूँ,
विश्राम हूँ,
बाहर से ठंडा,
भीतर संग्राम हूँ।
लौ छिपी है,
फिर भी आग अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
अकेला हूँ,
मजबूर नहीं,
कोई साथ नहीं,
हौसला चूर नहीं।
सब दूर हुए,
खुद पर विश्वास अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
सरल हूँ,
नर्म हूँ,
रिश्तों की खातिर,
थोड़ा विनम्र हूँ।
झुकता हूँ,
स्वाभिमान अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
गिरा था,
खड़ा हूँ,
हर चोट के बाद,
पहले से बड़ा हूँ।
घाव मिले हैं,
उठने का दम अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
कम बोलता,
सब जानता,
शब्दों से पहले,
मन पहचानता।
शब्द रुके हैं,
मेरा जवाब अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
पद नहीं,
ताज नहीं,
अपने ही दम पर,
किसी का मोहताज नहीं।
हाथ खाली हैं,
अपना मुकाम अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
उम्र बढ़ी,
उमंग वही,
राह नई है,
तरंग वही।
चाल धीमी है,
पर उड़ान अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
आज रुका,
कल चल दूँगा,
मौका मिलते,
फिर बढ़ लूँगा।
रात घनी है,
पर मेरी भोर अभी बाकी है।
शांत खड़ा हूँ आज मगर,
मेरी आँधी अभी बाकी है॥
— संतोष कुमार शर्मा