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मेरे डगमगाते कदम

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम हो, ना रहेगा कोई तुम्हारे साथ,
        
                                                    
                            
वक्त भी छोड़कर चला जायेगा तुम्हारा हाथ।
मगर मत हारना ऐ मंज़िल के मुसाफ़िर,
हमेशा होगा तुम्हारा धैर्य तुम्हारे साथ।
वो मंज़र भी आयेगा जब,
तुम छोड़ रहे होगे अपनों का साथ।
मन मचल रहा होगा,
कदम डगमगा रहे होंगे,
तब खड़ा रहेगा तुम्हारा धैर्य तुम्हारे साथ।।

 
एक महीने पहले
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